|

Buddha Quotes दुःख कहाँ से जन्म लेता है? बुद्ध का जीवन बदल देने वाला उत्तर

Buddha Quotes बुद्ध की सत्य खोज, यही कारण है आपके दुःखी होने का

दुःख कहाँ से जन्म लेता है? भगवान बुद्ध के अनमोल Quotes के माध्यम से जानिए दुःख का मूल कारण क्या है ? तृष्णा और आसक्ति की सच्चाई, और जीवन को शांति की ओर ले जाने वाला बुद्ध का मार्ग।

जीवन में हर इंसान दुखी क्यों है? बुद्ध का मनोवैज्ञानिक उत्तर (Buddha Quotes)

बुद्ध के अनुसार व्यक्ति के जीवन में दुःख बाहर नही, बल्कि अपने भीतर ही पैदा होता है | बुध्द के अनुसार दुःख के कुछ मुख्या कारण है जिसकी वजह से व्यक्ति दुखी है |

  • तृष्णा (अत्यधिक चाह) : व्यक्ति के पास जो है इससे व्यक्ति संतुष्ट नहीं है बल्कि जो उसके पास नहीं है उसकी लालसा व्यक्ति में मन में सदैव उत्पन्न होती है और उसीकी वजह से व्यक्ति के मन में निर्माण होती है “और चाहिए” यह भाव प्रत्येक के मन में उत्पन्न होने के कारण व्यक्ति के जीवन में दुःख उत्पन्न होता है और यही दुःख की जड़ है ऐसा बुध्द ने कहा है |
  • आसक्ति (पकड़ कर रखना) : अपने जीवन में मनुष्य लोभ, वस्तुए, पद, शरीर, इन सब के बंधन में खुद को बाँध लेता है और यह सब अस्थायी होने के बावजूद भी हम उन्हें स्थायी मान लेते है और खुद को दुखी करते रहते है यह दुःख का दूसरा महत्वपूर्ण कारण है |
  • अविज्ञा (सत्य का न जानना) : हम देखते है की सब कुछ अनिच्छा (अस्थायी) है, जीवन में सब कुछ दुःख की संभावना लिए है, और किसी चीज में स्थायी “मै” नहीं है (अनत्ता) जीवन के महत्वपूर्ण तथ्य को जानने के बावजूद खुद को सत्य से परे रखना, खुद को अँधेरे में रखना यह भी दुःख का कारण है |
  • तुलना : व्यक्ति अपने जीवन में दुखी होने का कारण और एक महत्वपूर्ण यह है की मनुष्य खुद की तुलना दुसरो से करता है, और दूसरो से इर्षा करता है साथ ही खुद के मन में असंतोष की भावना को उत्पन्न करता है यह एक दुःख का कारण बुद्ध ने बताया है |
  • अपेक्षाए : “जीवन में ऐसा होना चाहिए था” जब जीवन में हमारे मन के अनुसार घटनाए घटित नहीं होती है तब हमारा मन टूटने लगता है इसके कारण जीवन में दुःख उत्पन्न होता है, इसीलिए किसी भी प्रकार की अपेक्षाए करना व्यर्थ है |

इसके कारण व्यक्ति के जीवन में निरंतर दुःख चलता आ रहा है और इन्ही कारणों की वजह से लोग दुखी है, वे संसार को बदलना चाहते है परंतु अपने मन को नहीं बदलना चाहते है, यही पर जीवन की सबसे बड़ी भूल होती है, बुद्ध ने अपने प्रवचनों में उन्ही बातो पर सबसे ज्यादा जोर दिया है |

Buddha Quotes बुद्ध के अनुसार दुःख से बाहर कैसे आए?

मनुष्य को अपने जीवन में जो है जैसा है उसे स्वीकार करना सिखाना होगा, सदैव जागरुक रहना होगा, किसीभी प्रकार की आसक्ति को समझकर छोड़ दे और जो है जैसा है उसे यथार्थ भाव से देखना होगा कल्पना भाव से नहीं |

तथागत भगवान बुद्ध कहते है “दुःख को जानो” दुःख के कारण को जानो, और दुःख के कारण को जानने की पश्चात दुःख निरोध के मार्ग पर चलो |

सबका मंगल हो |

सभी प्राणी अकुशल कर्म से विरत हो ||

सभी को कुशल कर्म की संपदा प्राप्त हो |||

साधू | साधू || साधू |||

आमच्या सर्व पेजेस ला नक्की फोलो करा ….

YouTube Subscribe Now
फेसबुक ग्रुप फेसबुक ग्रुप 
व्हाट्सएप ग्रुप व्हाट्सएप ग्रुप 
टेलिग्राम जॉईन करा
Share Chat जॉईन करा

जर तुम्ही अशी नवीन माहिती शोधत असाल तर आमच्या वेबसाइट https://deshvarta.in/  वरून दररोज अपडेट रहा. यासाठी आत्ताच आमच्या सोशल मीडिया पेजेसमध्ये सहभागी व्हा.

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *