Navoday Vidyalaya सिलवासा में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई छत्रपति शिवाजी महाराज कि जयंती, गूंज उठा ‘जय शिवाजी’ का नारा।

Navoday Vidyalaya मे गुंज उठा जय भवानी – जय शिवाजी का नारा!

सिलवासा: Navoday Vidyalaya सिलवासा में स्वराज्य संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई गई। शिवाजी महाराज जन्म जयंती के आयोजन में विद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरा परिसर ‘जय शिवाजी’ के नारों से गूंज उठा और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत हो गया।

Vidyalaya कार्यक्रम की भव्य शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्राचार्य श्री व्ही. एस. कुशवाह द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुई। जीसमे विद्यालय के सभी शिक्षको द्वारा छत्रपती शिवाजी महाराज को वंदन किया गया। इसके पश्चात विद्यालय की संगीत शिक्षिका श्रीमती प्राजक्ता बोंडे ने कार्यक्रम का सूत्र संचालन किया और शिवाजी महाराज की जयंती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी को उनकी महानता से अवगत कराया।

Navoday Vidyalaya मे छत्रपती शिवाजी महाराज के जयंती के उपलक्ष मे भाषण!

Navoday Vidyalaya सिलवासा (संघ प्रदेश – दादरा और नगर हवेली) मे स्वराज्य के रचियता छत्रपती शिवाजी महाराज कि जन्म जयंती के उपलक्ष मे विद्यालय के विद्यार्थिओ द्वारा और शिक्षको द्वारा जोरदार भाषण प्रस्तुत हुवे जिससे उपस्थित छात्र – छात्राए और शिक्षको को मार्गदर्शन एवं प्रेरणा मिली ।

Navoday विद्यार्थियों के शिवाजी महाराज जयंती पर प्रेरणादायक भाषण 

विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी शिवाजी महाराज के जीवन और उनके शौर्य पर अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। कक्षा 7वीं की स्वरा शिंदे ने शिवाजी महाराज के बाल्यकाल और उनके स्वराज्य निर्माण के संकल्प पर प्रभावी भाषण दिया। वहीं, कक्षा 10वीं के कूनाल ने उनके पराक्रम, कूटनीति और युद्धनीति पर जोरदार वक्तव्य देकर सभी को प्रेरित किया। दोनो छात्रो के भाषणों ने यह संदेश दिया कि शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि एक कुशल प्रशासक और जनता के सच्चे राजा थे।

Vidyalaya के शिक्षकों का प्रेरणादायक संबोधन 

विद्यालय के अंग्रेजी शिक्षक श्री डी. एम. सुर्वे ने शिवाजी महाराज के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे सिर्फ तलवार के बल पर नहीं, बल्कि अपनी चतुराई, न्यायप्रियता और कुशल प्रशासन के कारण महान शासक बने। उन्होंने शिवाजी महाराज के जीवन की दो महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख किया:

  1. १६ वर्ष की आयु में स्वराज्य की शपथ – जब शिवाजी महाराज केवल १६ वर्ष के थे, तब उन्होंने तोरणा किले पर विजय प्राप्त कर स्वराज्य की नींव रखी। यह घटना उनके अडिग संकल्प और वीरता का परिचायक है।
  2. औरंगजेब से छलपूर्वक बच निकलना – छत्रपतीशिवाजी महाराज ने जब औरंगजेब के दरबार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, तब उन्हें बंदी बनाने का प्रयास किया गया। लेकिन अपनी बुद्धिमत्ता और चतुराई से वे आगरा के किले से सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे।

प्राचार्य श्री. व्ही. एस. कुशवाह द्वारा छात्रों को मार्गदर्शन

विद्यालय के प्राचार्य श्री वी. एस. कुशवाह सर ने अपने संबोधन में शिवाजी महाराज के चरित्र को आज के युग से जोड़ते हुए बताया कि छात्र उनके जीवन से कई महत्वपूर्ण बातें सीख सकते हैं,  जैसे:

  • स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता – जिस तरह शिवाजी महाराज ने अपनी सेना और शासन व्यवस्था को स्वदेशी बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की, उसी तरह छात्रों को भी आत्मनिर्भर बनकर अपने कौशल को विकसित करना चाहिए।
  • न्यायप्रियता और नेतृत्व क्षमता – शिवाजी महाराज ने सभी जाति और धर्म के लोगों को समान रूप से सम्मान दिया और एक आदर्श शासक के रूप में न्याय किया। आज के युवाओं को भी निष्पक्ष होकर सही निर्णय लेने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने की आवश्यकता है।
  • साहस और कर्तव्यनिष्ठा – जीवन में चुनौतियाँ हमेशा रहेंगी, लेकिन शिवाजी महाराज की तरह दृढ़ निश्चय और परिश्रम से हर बाधा को पार किया जा सकता है।

शिवजयंती समापन और उत्साहपूर्ण वातावरण

इस प्रेरणादायक कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर छात्रों में शिवाजी महाराज के विचारों को आत्मसात करने का उत्साह देखा गया। विद्यालय प्रांगण में चारों ओर शिवाजी महाराज के जयघोष गूंजते रहे और यह आयोजन सभी के लिए एक प्रेरणादायक अनुभव साबित हुआ।

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